दम मारो दम : इहे बम्बई नगरिया - संजय तिवारी

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  यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते इहे बम्बई नगरिया तू देख बबुआ। यहां दम मारो दम से लेकर स्कूल में डिस्को दीवाने दिखाने के खेल को पहले क्यो नही समझे...

 

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते

इहे बम्बई नगरिया तू देख बबुआ। यहां दम मारो दम से लेकर स्कूल में डिस्को दीवाने दिखाने के खेल को पहले क्यो नही समझे ? हर हिन्दू बेईमान और पादरी, मौलवी ईमानदार, नैतिक दिखाए जाते रहे तब भी नही समझे। मेरे अँगने में तुम्हारा क्या काम है गाने वाले को सहस्त्राब्दी के महानायक किसने बनाया? लड़कियों को अधनंगे रहने के नाम पर प्रगतिशीलता झड़ने के तर्क किसने गढ़े? यहां के हर नचनिया और तवायफ को स्टार, सुपरस्टार, हीरो आदि कहने की परंपरा किसने विकसित की? भारत की सीमाओं पर शहीद होने वाले असली नायकों , महानायको में से कितनो के नाम किसको याद है? देश की तरक्की में योगदान करने वाले असली वैज्ञानिकों, चिकित्सको, अभियंताओं या भारतीय शास्त्रीय परंपराओं के वास्तविक लोगो का कोई नामलेवा नही। देश मे गंगा, कोसी, ब्रह्मपुत्र, यमुना , कावेरी, गोदावरी आदि नदियों से लेकर सागर की लहरों और हिमालय की उपत्यकाओं पर पल बनाने वाले कितने अभियंताओं को आप जानते है? पिछले लगभग 100 वर्षो के बम्बइया सिनेमा के इतिहास से अखिल क्या मॉडल पाया है भारत के सामान्य समाज ने। हत्या, लूट, नशा, बलात्कर, अपहरण, तस्करी, गद्दारी, बड़ो का अनादर, समलैंगिकता, बदतमीजी, अनैतिक आचरण, बाल अपराध, मनबढाई, गुंडागर्दी , धूम्रपान आदि के अलावा क्या दिया है इस सिनेमा ने? इस तरफ कभी किसी सरकार का ध्यान क्यो नही गया कि भारत का जो सिनेमा सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र से अपनी यात्रा शुरू किया था वह कमीने, रोड, दबंग, वर्दी वाला गुंडा जैसे शीर्षकों तक क्यो आ गया ?

अभी दो तीन साल पहले एक कार्यक्रम लेकर कुछ नामचीन मेकर्स आये थे, रोस्टेड। यदि आपने देखा हो तो याद कीजियेगा। खुद ही शर्म आ जायेगी। इनमे जो कुछ खास चेहरे याद आ रहे है उनके नाम लिखने का मन कर रहा- दीपिका पादुकोण, सोनाक्षी सिन्हा, कारण जौहर, रणवीर सिंह। और भी बहुत से नाम थे। अभी भी यह कार्यक्रम यूट्यूब पर होगा, देखिए और सोचिये।

गजब की इनकी दुनिया है भाई। कठवा में कुछ हुआ था। महीने भर बाद इस दुनिया ने पहाड़ उठा लिया था। जब देश मे कुछ भी नही था तो आमिर खान की पत्नी किरण राव और मियां नसीरुद्दीन को डर लगने लगा था। एक मियां साहब तो उसी दिन भारत से निकल जाने वाले थे जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए थे। देश की जनता का धन, जनता का भाव संसार और जनता की मानसिकता पर काबिज होकर अय्याशीयो में डूबे इस साम्राज्य की नींव हिला दी है एक हिन्दू कन्या ने। ऐसी कन्या जिसका बहुत शोषण किया इन लोगो ने, लेकिन आज वह जिस तरह से मैदान में मराठा भवानी बन कर उतरी है , इन कथित महानायको और स्टारों की बोलती बंद हो गयी है। मुझे याद है , भारत के शीर्ष कोर्ट ने नितांत अभारतीय एक निर्णय दिया था, दो पुरुषों के बीच संबंधों को वैवाहिक आवरण में रखने का , करण जौहर नाम के नचनिया ने इसे हिस्टोरिकल बताया था। फिर लिव इन भी आया। मुझे अभी तक यह समझ मे नही आता कि भारत के लोगो ने इन नए कानूनों के खिलाफ आवाज क्यो नही उठायी।

मुम्बई में अभारतीयता का खेल आज से नही खेला जा रहा। हिंदवी स्वराज्य के उद्घोषक वीर शिवा की धरती के केंद्र में ऐसा तांडव , ऐसी विधर्मी गतिविधि, ऐसी बेशर्मी, ऐसी नग्नता। आखिर सब युद्ध जैसा ही तो है। कोई मुम्बइया नायकों से पूछे कि क्या कंगना भारतीय सिनेमा जगत का हिस्सा नही। क्या वह स्त्री नही। क्या उसकी कोई निजता नही। क्या उसके लिए कोई मानव अधिकार नही। सिर्फ इसलिए क्योंकि वह हिन्दू है। सिर्फ इसलिए क्योंकि वह भारतीयता की बात करती है। सिर्फ इसलिए क्योंकि स्त्री व्यापार और ड्रग्स के कारोबार के विरुद्ध उसने युद्ध छेड़ दिया है? 

मुझे तो कुछ बड़ा ही अलग दिख रहा है। सैकड़ो वर्ष के बाद एक नई अहिल्याबाई, एक और जीजा बाई जैसी छवि दिख रही है इस लड़की में। उनसे थोड़ी सी अलग इसलिए है क्योंकि इसमें महारानी लक्ष्मीबाई के भी अक्स हैं। कुछ लोगो को मेरी बात अजीब लगेगी। लेकिन देखते जाइये। कंगना के युद्ध तो अभी शुरू भी नही हुआ है। अभी यह उतना ही है , जितना द्रौपदी के संकल्प के पहले रहा होगा। इस युद्ध के पीछे बहुत कुछ है। एक भारतीय नारी ने कितनो के होश उड़ा दिए है, इसका अंदाजा बहुत कम ही लोगो को है। आतंक, ड्रग्स के कारोबार और भारत विरोध की सुरंग में इसने आग लगाई है, वह भी बड़े सलीके से। अभी अभी अखिल भारतीय सन्त समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानन्द जी सरस्वती की एक अति गंभीर पोस्ट आयी है। इसका सीधा संबंध इसी युद्ध से है। उद्धव के घर को बम से उड़ाने की धमकी का यह है असल सच । अपने विरोधी को जो गलती करने पर मजबूर कर दे वही होता है असली कूटनीतिज्ञ। वही होता है सही अर्थों में चाणक्य।

मोदी, शाह, डोभाल की तिकडी ने यही किया उद्धव के साथ। दाऊद ने उद्धव को धमकी नहीं दी बल्कि एजेंसीज ने उद्धव को दाऊद से बात करते पकड़ा ?

दिल्ली और मुम्बई मीडिया में ये हलचल बहुत तेज है कि दाऊद ने बीती रात उद्धव से बात की थी ? यह बातचीत इतनी गुप्त तरीके से हुई थी कि उद्धव और दाऊद दोनों को पूर्ण विश्वास था कि एजेंसीज ट्रेस नही कर पाएगी, पर भारतीय एजेंसीज तो उस्ताद हैं ही, ऊपर से दाऊद का कॉल, ट्रेस कर लिया? खबर PMO, NSA के जरिए पीएम को दी गयी, वेट एंड वाच का फरमान आया, शायद इसलिए कि केंद्र जानना चाहता था कि कॉल एकतरफा थी या सहमति से की गई कॉल थी ? जब दोपहर तक महाराष्ट्र से कोई हलचल नहीं हुई फिर केंद्र को पक्का विश्वास हो गया कि बात सहमति से की गई है। खबर फोन रिसीव करने वाले तक पहुँचाई गई कि रात जो तुमने कांड किया है वो हमें पता चल चुका है। फिर उद्धव को काठ मार गया और आनन फानन में मीडिया के जरिये ये अफवाह फैलाई गई कि दाऊद ने कॉल कर महारष्ट्र सीएम को धमकी दी है । आप खुद सोचिए कि अगर दाऊद जैसा डॉन किसी राज्य के मुख्यमंत्री को रात में धमकी देता है फिर उस राज्य का पुलिसिया तंत्र और प्रशासनिक अमला अगले दिन 4 बजे शाम तक सोता रहेगा? अगर धमकी रात को मिली थी फिर रात को ही मीडिया को जानकारी क्यों नही दी गई? सुबह दे देते, पर वो भी नही किया? जी हाँ, संजय राउत ऐसे ही नहीं पगलाया हुआ है। कोई ऐसा बहुत बहुत बड़ा फँसा है जिसे बचाने के लिए हर यत्न किए जा रहे हैं।

स्वामी जी की इस टिप्पणी , इस पोस्ट से स्पष्ट है कि कंगना के घर क्यो तोड़ा गया और अब खुद को मराठा मानुष का अलंबरदार कहने वाले शरद पवार को क्यो सामने आना पड़ा यह कहने के लिए कि कंगना के घर को नही तोडना चाहिए था। यदि कंगना ने कहा है चुनौती देकर कहा है कि उद्धव ठाकरे, तुमने मेरा घर तोड़ा है, मैं तुम्हारा घमंड तोड़ दूंगी, तो इस चुनौती को समझिए। कंगना अब भारत की नारी शक्ति की प्रतिनिधि है, हर बेटी, बहन और बहू की प्रतिनिधि है। वामी, आपी, कांगी विचारकों की पोस्टें मत पढिये। युद्ध शुरू हो गया है, भारतीय मूल्यों की रक्षा के इस युद्ध मे शामिल होइए।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते।।

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दम मारो दम : इहे बम्बई नगरिया - संजय तिवारी
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