कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस द्वारा घोषित मुफ्त की रेबडियों की हकीकत।



कर्नाटक चुनाव के दौरान कांग्रेस ने पांच गारंटी घोषित की थीं। सभी घरों को ‘गृह ज्योति’ योजना के तहत दो सौ यूनिट बिजली मुफ्त देने का वादा किया, साथ ही हर परिवार की महिला मुखिया को ‘गृह लक्ष्मी’ योजना के तहत दो हजार रुपए मासिक की घोषणा की। गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों के हर सदस्य को ‘अन्न भाग्य’ योजना के तहत 10 किलो अनाज मुफ्त देने का वादा किया तो ‘युवा निधि’ योजना के तहत डिग्रीधारी बेरोजगारों को तीन हजार रुपए महीना और डिप्लोमाधारी युवाओं को डेढ़ हजार रुपए महीना देने की घोषणा की । सरकारी बसों में ‘शक्ति’ योजना के तहत महिलाओं को मुफ्त यात्रा का पास देने को कहा।

इन वादों को अमली जामा तुरंत पहनाना कांग्रेस के लिए इसलिए भी जरूरी था क्योंकि पांच अन्य राज्यों में भी इसी साल चुनाव होने हैं, इसलिए आनन फानन में पहली कैबिनेट में इन पांच योजनाओं को लागू करने की घोषणा भी कर दी। 

लेकिन अब सवाल यह है कि इन योजनाओं का प्रभाव क्या होगा ? इन्हें लागू करने में करीब 60 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। जबकि कर्नाटक का सालाना बजट ही मात्र तीन लाख नौ हजार करोड़ रुपए का है, जिसमें भी 77,750 करोड़ रुपए का कर्ज है। उसे घटा दिया जाए तो बजट की कुल रकम बचती है - 231250 करोड़। 

इनके अलावा भी कुछ अन्य मुफ्त वाली योजनाएं पहले से चल रही हैं। बिजली सेक्टर को पहले से साढ़े नौ हजार करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जा रही है। इसी तरह किसानों के लिए ‘रैयत शक्ति योजना’ चल रही है, स्वास्थ्य के क्षेत्र में ‘यशस्विनी योजना’ है, दूध की कीमत पर सरकार छह रुपए प्रति लीटर तक पहले से दे रही है। इन्हें भी माइनस कर दिया जाए तो बजट की राशि महज पोने दो लाख करोड़ ही शेष रहेगी। सरकारी कर्मचारियों के वेतन को माईनस करें तो बमुश्किल तमाम बजट की रकम बचेगी महज एक लाख करोड़। इसमें राज्य का विकास क्या ख़ाक होगा ? कर्जा तो निश्चित रूप से और बढ़ेगा ही। 

इसीलिए कांग्रेस ने रणनीति अनुसार सर्वाधिक आर्थिक बोझ वाली योजना "गृहलक्ष्मी" के क्रियान्वयन को नवम्बर तक टाला है। शायद सोचा होगा कि पांच राज्यों के चुनाव निबट जाएँ, फिर देखेंगे कि करें या ना करें। 

नंदिनी दूध के दाम पांच रुपये किलो बढ़ाने की तैयारी है। अब दूध मुफ्त देंगे तो उसकी भरपाई भी तो आपसे ही करेंगे। 

बिजली के दाम तो ढाई रुपये यूनिट बढ़ा ही दिए हैं। मुफ्त बिजली देंगे तो उसकी कीमत भी तो आपसे ही बसूल करेंगे। 

चुनावी वादों की हकीकत -

भेड़ों से नेताजी ने वादा किया कि वे हर भेड़ को एक-एक कम्बल देने जा रहे हैं | 

भेड़ों का झुण्ड ख़ुशी से झूम उठा | 

उनकी हर्ष ध्वनि से आकाश में चहुँओर मिमियाहट गूंजने लगी | 

फिर एक मेमने ने धीरे से अपनी माँ से पूछ लिया -

"ये नेताजी हमारे कम्बलों के लिए ऊन कहाँ से लाने वाले हैं" ?

फिर वहां सन्नाटा था। 

एक महत्वपूर्ण घटनाचक्र में केंद्र सरकार द्वारा मुफ्त की रेबडियों वाली घोषणाओं पर अंकुश लगाने के लिए कर्ज लेने की सीमा घटा दी गई है। अब घोषणाएं तो की जा सकती है, लेकिन उन पर अमल बहुत मुश्किल हो जाएगा।  

जैसा कि हिमाचल प्रदेश में दिखाई देने लगा है। जहाँ मुफ्त की बिजली देने का ऐलान तो कर दिया गया, लेकिन अब कांग्रेस सर्कार को समझ में नहीं आ रहा है उस पर कैसे अमल करें। हिमाचल में भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। 

अब क्या आम आदमी पार्टी और क्या भाजपा, सभी कांग्रेस का मजाक उड़ा रहे हैं। 


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