शिवपुरी का सौहार्द तोड़ने की साजिश, पत्रकारिता या षड्यंत्र?
शिवपुरी की शांत और सौम्य भूमि हमेशा से सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल रही है। यहां के नागरिकों ने हमेशा एक-दूसरे की खुशियों में सहभागिता निभाई है और दुःख में कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े हुए हैं। किन्तु दुर्भाग्य है कि आज कुछ लोग पत्रकारिता की आड़ लेकर इस सौहार्द को बिगाड़ने का कुचक्र रचने लगे हैं।
6 अक्टूबर को फेसबुक पर एक तथाकथित पत्रकार द्वारा की गई पोस्ट ने इसी कुटिल प्रवृत्ति को उजागर कर दिया। बिना किसी पुलिस प्राथमिकी या आधिकारिक रिपोर्ट के, केवल अनुमान और पूर्वाग्रह के आधार पर गोवंश कुचलने की घटना को “हिंदू युवकों” से जोड़कर प्रस्तुत करना न केवल पत्रकारिता के उसूलों का मज़ाक है बल्कि कानून और समाज, दोनों के लिए घातक है। जब तक पुलिस ने किसी आरोपी की पहचान नहीं की, तब तक इस प्रकार की धार्मिक रंगत देने वाली पोस्ट केवल और केवल सांप्रदायिक विष फैलाने का काम करती है।
इतना ही नहीं, इस पोस्ट पर की गई टिप्पणियों ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया। कुछ लोगों ने खुलेआम लिखा कि अगर आरोपी मुस्लिम होता तो कार्यवाही हो जाती, यानी साफ संकेत कि कानून धर्म देखकर काम करता है। यह सोच न केवल संविधान का अपमान है, बल्कि समाज को आपस में बाँटने का नंगा प्रयास है। जब पत्रकारिता का उपयोग तथ्य देने के बजाय सांप्रदायिक आग भड़काने के लिए होने लगे, तब समाज में अविश्वास और तनाव का वातावरण बनना स्वाभाविक है।
यह प्रश्न उठाना आवश्यक है कि आखिर ऐसे लोग किस एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं? क्या पत्रकारिता का कर्तव्य केवल इतना रह गया है कि बिना प्रमाण के किसी समुदाय को कटघरे में खड़ा किया जाए? क्या यह शिवपुरी जैसे शहर में साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की सुनियोजित साजिश नहीं है?
राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से देखा जाए तो भारत की आत्मा उसकी सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सौहार्द में निहित है। हिंदू हो, मुस्लिम हो, या कोई भी अन्य समुदाय – जब तक सब मिलकर समाज के ताने-बाने को सुदृढ़ रखते हैं, तब तक देश की मजबूती पर कोई प्रश्न नहीं उठ सकता। लेकिन जब “पत्रकारिता” की आड़ में कुछ लोग हिन्दू समाज को दोषी ठहराने और झूठे नैरेटिव गढ़ने लगते हैं, तो यह न केवल हिंदुत्व का अपमान है बल्कि राष्ट्रीय एकता पर सीधा आघात है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज ऐसे तत्वों को पहचानकर अस्वीकार करे। पत्रकारिता का धर्म है सच को सामने लाना, न कि अफवाह और सांप्रदायिक जहर परोसना। शिवपुरी की जनता को यह समझना होगा कि ऐसे प्रयास केवल नगर की शांति नहीं बिगाड़ते बल्कि राष्ट्रीय हितों को भी चोट पहुँचाते हैं।
भारत राष्ट्र की आत्मा ‘सत्य’ और ‘सौहार्द’ है। कोई भी व्यक्ति यदि इन मूल्यों को तोड़ने का प्रयास करता है, चाहे वह पत्रकार कहलाए या कुछ और, तो उसका पर्दाफाश करना हर राष्ट्रभक्त का कर्तव्य है। शिवपुरी का सौहार्द हमारी पहचान है और इसे किसी भी कीमत पर बिगाड़ने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।

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