भोपाल की बंद बैठक में क्या हुआ? दिल्ली वाला फैसला बना सबसे बड़ा रहस्य!
भोपाल के मुख्यमंत्री निवास में हुई बीजेपी की नवगठित कोर कमेटी की बैठक ने सियासी गलियारों में एक ऐसा सन्नाटा पैदा कर दिया है, जिसके पीछे हलचल बेहद तेज बताई जा रही है। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश जरूर हुई, लेकिन अंदर की चर्चाओं ने कई अनकहे सवाल छोड़ दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में हुई इस बैठक में राजनीतिक नियुक्तियों से लेकर दतिया विधानसभा की संभावित चुनावी स्थिति और राज्यसभा की चौथी सीट तक कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि जब नियुक्तियों में देरी और गुटबाज़ी को लेकर कुछ नेताओं ने खुलकर नाराज़गी जताई, तो जवाब में साफ कहा गया कि यह मामला “दिल्ली में लंबित” है।
यही एक वाक्य अब पूरी बैठक का सबसे बड़ा रहस्य बन गया है। क्या मध्यप्रदेश बीजेपी के अहम फैसले अब पूरी तरह दिल्ली से तय हो रहे हैं? या फिर प्रदेश स्तर पर नेतृत्व के बीच कोई असहमति है, जिसे सार्वजनिक होने से रोका जा रहा है?
बैठक के दौरान कुछ ऐसे घटनाक्रम भी हुए, जिन्होंने सस्पेंस को और गहरा कर दिया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का अचानक बैठक छोड़कर दिल्ली रवाना हो जाना और शिवराज सिंह चौहान का अनुपस्थित रहना, इन दोनों बातों ने राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। इसे महज संयोग माना जाए या किसी बड़े बदलाव की आहट, यह अभी साफ नहीं है।
बैठक में यह बात भी सामने आई कि सरकार और संगठन के बीच तालमेल पहले जैसा नहीं रहा। इस दूरी को कम करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मंत्रियों और विधायकों को नियमित रूप से कार्यकर्ताओं और जनता से सीधे संवाद करने का सुझाव दिया, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कदम वास्तविक समस्या का समाधान है या सिर्फ स्थिति को संभालने की कोशिश?
कुल मिलाकर यह बैठक कई ऐसे संकेत दे गई है, जो आने वाले समय में मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं। फिलहाल सब कुछ शांत दिख रहा है, लेकिन अंदर ही अंदर कुछ ऐसा जरूर चल रहा है, जो सही समय पर सामने आते ही सियासी समीकरण बदल सकता है।

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