14 दिन में फैसला नहीं तो एक्शन: MP पुलिस पर सख्ती
नए आदेश के मुताबिक, अगर किसी मामले में प्रारंभिक जांच की जरूरत है, तो उसे हर हाल में 14 दिन के भीतर पूरा करना होगा। इसी समय सीमा के अंदर पुलिस को यह तय करना पड़ेगा कि एफआईआर दर्ज करनी है या नहीं। तय समय सीमा का उल्लंघन हुआ, तो सीधे जिम्मेदार अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, पीएचक्यू तक लगातार ऐसी शिकायतें पहुंच रही थीं कि कई मामलों को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। जांच के नाम पर देरी के पीछे अवैध वसूली और दबाव की बातें भी सामने आती रही हैं। यही वजह है कि अब इस पर सख्त रुख अपनाते हुए पूरे प्रदेश के एसपी और पुलिस कमिश्नरों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया है, जिससे आम जनता को समय पर न्याय मिल सके और पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जा सके।
अब साफ है या तो 14 दिन में फैसला लो, या कार्रवाई झेलो। इस आदेश के बाद पुलिस सिस्टम में जवाबदेही बढ़ेगी या फिर नए विवाद खड़े होंगे, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है।

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