ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग का बढ़ता जाल - अनिकेत सिंह
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ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया तथा डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस जैसी एजेंसियां ऑनलाइन गेमिंग पर निगरानी रखती हैं, लेकिन साइबर गेमिंग चलाने वाले उनसे भी ज्यादा चालाक साबित हो रहे हैं। कर्नाटक के कोप्पल जिले में ऑनलाइन बेटिंग और जुए की लत में फंसे 18 वर्षीय युवक मनदीप द्वारा किया गया हत्याकांड बेहद चौंकाने वाला है। उसके माता-पिता उसे ऑनलाइन सट्टेबाजी से दूर करने के लिए रोज समझाते थे, लेकिन साईं वेंकट मनदीप लगातार रोक-टोक से बेहद चिढ़ गया था। पिछले एक वर्ष में वह सट्टेबाजी में परिवार के 15 लाख रुपए गंवा चुका था। दो दिन पहले उसने अपने माता-पिता और बहन पर चाकू से हमला कर दिया। हमला करने के बाद उसने खुद पर भी चाकू चला लिया।
उसके 45 वर्षीय पिता की मृत्यु हो गई, जबकि उसकी 19 वर्षीय बहन प्रगति की मौके पर ही मौत हो गई। उसकी मां जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही है। घटना के समय मनदीप के दादा भी वहां मौजूद थे। उन्होंने पड़ोसियों को आवाज लगाकर बुलाया था।
पुलिस ने भी दर्ज किया है कि बेटे की बेटिंग की लत के कारण परिवार आर्थिक संकट झेल रहा था। मोबाइल छीन लेना लगभग असंभव हो जाता है। यदि ज्यादा जोर-जबरदस्ती की जाए तो उसे शांत कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। जब किशोर ऑनलाइन गेम्स में बेटिंग यानी सट्टेबाजी वाली गेम्स खेलने के आदी हो जाते हैं, तब उन्हें उस लत से बाहर निकालने में बहुत समय लगता है। ऐसे लोग गेम खेलते समय मिली जीत पर अकेले-अकेले चीखते-चिल्लाते और उत्साह व्यक्त करते नजर आते हैं।
युवाओं में ऑनलाइन बेटिंग गेम्स की लत इतनी गहरी हो जाती है कि वे अपने माता-पिता की बात तक नहीं मानते। अपना बच्चा हाथ से निकल गया है, यह समझने के बावजूद माता-पिता का स्नेह उन्हें कठोर कदम उठाने से रोकता है। जब भी ऑनलाइन गेमिंग के कारण कोई घटना सामने आती है, तब फरवरी 2026 की वह घटना याद आती है, जिसमें कोरियन गेम्स की लत में फंसी 12, 14 और 16 वर्ष की तीन लड़कियों ने नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। उस समय भी ऑनलाइन गेम्स के दुष्प्रभावों को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। आत्महत्या करने वाली तीनों लड़कियों ने लिखा था, “सॉरी पापा, कोरियन गेम ही हमारी जिंदगी है।”
तीनों लड़कियां कोरियन गेम्स में इतनी डूबी हुई थीं कि उन्होंने अपने नाम भी कोरियाई शैली के नामों के अनुसार रख लिए थे। जब उनसे गेम खेलने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मोबाइल और कंप्यूटर छीन लिए गए, तब उन्होंने एक के बाद एक कूदकर आत्महत्या कर ली। गाजियाबाद की यह घटना बेहद दिल दहला देने वाली थी।
ऑनलाइन बेटिंग करवाने वाली कंपनियां लोगों को एक बार जिताती हैं और चार बार हराती हैं। हारने वाले व्यक्ति को और अधिक खेलने के लिए प्रेरित करने हेतु लोन ऐप्स तक डाउनलोड करवाई जाती हैं। वर्षों से गलियों और मोहल्लों में खेले जाने वाले जुए ने अब ऑनलाइन रूप ले लिया है। कई लड़के-लड़कियां स्कूल की पढ़ाई पर जितना ध्यान नहीं देते, उससे कहीं अधिक ध्यान गेमिंग पर देते हैं।
गेमिंग और ऑनलाइन बेटिंग के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहे हैं। माता-पिता के लिए ये घटनाएं आंखें खोल देने वाली हैं। बच्चों को उचित उम्र में ही मोबाइल देना चाहिए। जो माता-पिता बच्चों के मनोरंजन के लिए ऑनलाइन गेमिंग की अनुमति देते हैं, उन्हें भी उन पर विशेष निगरानी रखनी चाहिए। कई बार जब बेटिंग में शुरुआती जीत मिल जाती है, तब माता-पिता भी अनजाने में ऐसी गतिविधियों को प्रोत्साहन देने लगते हैं।
वरली मटका पर प्रतिबंध होने के बावजूद पुलिस तंत्र की रहम-नजर के कारण वरली मटका और जुए के अड्डे चलते रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गेमिंग कंपनियों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाने का फैसला उनके लिए बड़ा झटका था, लेकिन इसके बावजूद कई कंपनियां नए नामों से ऐप लॉन्च कर ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार जारी रखे हुए हैं। यह स्थिति समाज, परिवार और विशेष रूप से युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
अनिकेत सिंह
लवकुश कोचिंग क्लास,
शाॅप नंबर-12, प्रथम तल,
अभिषेक एलिसियम, एक्सिस बैंक लेन, समा-सालवी रोड, न्यू समा,
बड़ौदा-390008 (गुजरात)
मो- 8368681336
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लेख

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