नरोत्तम का पत्ता साफ, बीजेपी का नया ब्रह्मास्त्र आशुतोष
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दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अंतिम क्षणों में बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का पत्ता काट दिया है। पार्टी ने शुक्रवार को आशुतोष तिवारी को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया। यह घोषणा ऐसे समय हुई, जब नरोत्तम मिश्रा पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके थे। उन्होंने नामांकन फॉर्म खरीद लिया था और शुक्रवार को नामांकन दाखिल करने की चर्चाएं भी तेज थीं। लेकिन ऐन वक्त पर पार्टी के फैसले ने पूरे राजनीतिक समीकरण बदल दिए।
भाजपा ने यह सूची दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा राजेंद्र भारती की सजा पर रोक लगाने से इनकार किए जाने के तुरंत बाद जारी की। इसके साथ ही दतिया में उम्मीदवार को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया। अब तक 13 लोगों ने नामांकन फॉर्म खरीदे हैं, जिनमें से 4 उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल भी कर चुके हैं।
उपचुनाव की घोषणा के बाद से डॉ. नरोत्तम मिश्रा लगातार दतिया में सक्रिय थे। वे जनसभाएं कर रहे थे, कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे थे और सार्वजनिक मंचों से अपनी पिछली राजनीतिक भूलों के लिए मतदाताओं से माफी भी मांग रहे थे। इससे यह लगभग तय माना जा रहा था कि पार्टी एक बार फिर उन्हीं पर भरोसा जताएगी। लेकिन भाजपा नेतृत्व ने अंतिम समय में नया चेहरा उतारकर सभी को चौंका दिया।
भाजपा के नए उम्मीदवार आशुतोष तिवारी लंबे समय तक संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वे भाजपा के संभागीय संगठन मंत्री रह चुके हैं और मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी प्राप्त कर चुके हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सेवढ़ा सीट से भाजपा टिकट की दावेदारी की थी, हालांकि तब पार्टी ने प्रदीप अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया था।
आशुतोष तिवारी की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनका मजबूत संगठनात्मक अनुभव माना जा रहा है। वे पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके मैदान में उतरने से भाजपा का पूरा संगठन पूरी मजबूती से सक्रिय होगा। साथ ही उमा भारती के प्रभाव के कारण लोधी समाज का बड़ा वर्ग भी भाजपा के पक्ष में एकजुट होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे दतिया उपचुनाव के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
भाजपा के इस अप्रत्याशित फैसले ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी इस उपचुनाव को केवल एक सीट नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतरी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि नरोत्तम मिश्रा इस फैसले के बाद क्या रुख अपनाते हैं और दतिया की जनता भाजपा के इस नए दांव पर कैसी प्रतिक्रिया देती है।
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राजनीति

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