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मोदी का मास्टरस्ट्रोक! कई मंत्री OUT?

 




नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्र की राजनीति में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीसरी सरकार का अब तक का सबसे बड़ा कैबिनेट फेरबदल करने की तैयारी में हैं। यदि सूत्रों की मानें तो 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले कभी भी इसकी औपचारिक घोषणा हो सकती है।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार इस बार का फेरबदल केवल मंत्रालयों के पुनर्वितरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार की पूरी कार्यशैली और राजनीतिक रणनीति को नया स्वरूप देने वाला हो सकता है। बताया जा रहा है कि कई वरिष्ठ मंत्रियों की विदाई लगभग तय मानी जा रही है, जबकि कई नए और युवा चेहरों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

सूत्रों का दावा है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी तथा केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा के नाम उन नेताओं में शामिल हैं जिनके मंत्रालयों में बदलाव या मंत्री पद से हटाए जाने की संभावना सबसे अधिक बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार इस फेरबदल के पीछे भाजपा नेतृत्व की दो बड़ी रणनीतियां काम कर रही हैं। पहली, केंद्र सरकार में युवाओं की भागीदारी बढ़ाकर कैबिनेट की औसत आयु कम करना। बताया जा रहा है कि 65 वर्ष से अधिक आयु वाले कई नेताओं को संगठन या अन्य जिम्मेदारियां देकर सरकार में नए चेहरों को अवसर दिया जा सकता है। दूसरी रणनीति उन नेताओं और सांसदों को राजनीतिक सम्मान देना है जो विभिन्न दलों से अलग होकर भाजपा या एनडीए के साथ आए हैं। इनमें पंजाब, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से जुड़े कुछ प्रमुख नामों पर गंभीरता से विचार होने की चर्चा है।

सूत्रों के मुताबिक हरदीप सिंह पुरी की उम्र और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति उनके संभावित बाहर होने की प्रमुख वजह मानी जा रही है। वहीं निर्मला सीतारमण को संगठन में दक्षिण भारत की राजनीति को मजबूत करने की अहम जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। हालांकि उनके प्रति शीर्ष नेतृत्व की नाराजगी जैसी कोई बात सामने नहीं आई है और उन्हें अभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह की कोर टीम का महत्वपूर्ण सदस्य माना जा रहा है।

वित्त मंत्रालय के लिए भी नए नामों की चर्चा तेज है। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल संभावित विकल्पों में शामिल हो सकते हैं, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी अटकलों का बाजार गर्म है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि उनके पूरी तरह बाहर होने की संभावना कम है। यदि बदलाव होता भी है तो उन्हें किसी दूसरे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है। ओडिशा की राजनीति में संभावित बदलाव की स्थिति में उनकी भूमिका और भी अहम हो सकती है।

उधर, भाजपा की 'एक व्यक्ति-एक पद' नीति के तहत पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा के मंत्री पद छोड़ने की चर्चा भी तेज है। दोनों नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के कारण सरकार से हटाया जा सकता है।

सबसे दिलचस्प चर्चा नए चेहरों की एंट्री को लेकर है। राजनीतिक गलियारों में अनुराग ठाकुर की वापसी की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा पंजाब की राजनीति को साधने के लिए आम आदमी पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं, दक्षिण भारत से डी. पुरंदेश्वरी, पश्चिम बंगाल से भाजपा के साथ आए नेताओं तथा महाराष्ट्र में शिवसेना के शिंदे गुट के सांसदों को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की अटकलें हैं। पंजाब से तरुण चुघ का नाम भी संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है।

हालांकि केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से अब तक कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में इन सभी नामों और संभावित बदलावों को फिलहाल सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के रूप में ही देखा जा रहा है। लेकिन यदि यह फेरबदल होता है तो मोदी सरकार 3.0 का यह अब तक का सबसे बड़ा और सबसे चर्चित राजनीतिक बदलाव साबित हो सकता है।

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