नबीन की नई टीम में ‘पावर गेम’! किस राज्य का दबदबा?
0
टिप्पणियाँ
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर संगठन के भीतर बड़े बदलावों और नए राजनीतिक समीकरणों के संकेत दे दिए हैं। नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अनुभवी नेताओं के साथ युवा चेहरों, महिलाओं, पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति-जनजाति, किसानों और अल्पसंख्यक समाज को प्रतिनिधित्व देकर भाजपा ने एक साथ कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। सबसे खास बात यह है कि नई टीम में राज्यों के बीच संतुलन साधने के साथ-साथ उन प्रदेशों को भी विशेष महत्व दिया गया है, जहां आने वाले वर्षों में भाजपा के लिए संगठनात्मक मजबूती बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।
नितिन नबीन की टीम को गौर से देखें तो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली का प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है। इसके अलावा राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वोत्तर राज्यों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। यानी भाजपा ने राष्ट्रीय संगठन को किसी एक क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों और सामाजिक समूहों को जोड़ने की कोशिश की है।
मध्य प्रदेश को मिला खास महत्व
नई राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व बेहद प्रभावशाली दिखाई देता है। लाल सिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, गजेंद्र पटेल को राष्ट्रीय महासचिव और कविता पाटीदार को राष्ट्रीय सचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा वीडी शर्मा को प्रकोष्ठ संकुल संयोजक, बंसीलाल गुर्जर को किसान मोर्चा अध्यक्ष तथा आशीष उषा अग्रवाल को मीडिया सह-संयोजक बनाया गया है।
इस तरह मध्य प्रदेश को केवल एक-दो पद नहीं बल्कि संगठन के कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर प्रतिनिधित्व मिला है। राष्ट्रीय संगठन से लेकर किसान मोर्चा, मीडिया और शीर्ष पदों तक मध्य प्रदेश की मौजूदगी यह संकेत देती है कि भाजपा के केंद्रीय संगठन में प्रदेश की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश का भी मजबूत दखल
देश की सबसे बड़ी राजनीतिक प्रयोगशाला माने जाने वाले उत्तर प्रदेश को भी नई टीम में पर्याप्त स्थान मिला है। स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। वहीं रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की भूमिका में रहेंगे।
इसके साथ ही भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव, अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष बनाया गया है। साफ है कि उत्तर प्रदेश के लिए भाजपा ने संगठनात्मक प्रतिनिधित्व के साथ-साथ सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश की है।
दिल्ली बना राष्ट्रीय संगठन का अहम केंद्र
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन का मुख्यालय दिल्ली में होने के कारण राजधानी का महत्व स्वाभाविक है, लेकिन नई टीम में दिल्ली से जुड़े नेताओं को मिली जिम्मेदारियां इस महत्व को और बढ़ाती हैं।
राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं संदीप पाठक, स्वदेश सिंह और जय प्रकाश राष्ट्रीय सचिव हैं। संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी दिल्ली से जुड़े हैं। इसके अलावा मीडिया और सोशल मीडिया से संबंधित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में भी दिल्ली के नेताओं की भागीदारी है।
इससे स्पष्ट है कि भाजपा के केंद्रीय संगठन में दिल्ली का प्रशासनिक और रणनीतिक महत्व कायम है।
गुजरात से युवा और संगठनात्मक चेहरों पर भरोसा
गुजरात को भी नई टीम में महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिला है। वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जगदीश ईश्वरभाई पटेल और रोहन गुप्ता को राष्ट्रीय सचिव तथा डॉ. हेमांग जोशी को युवा मोर्चा अध्यक्ष बनाया गया है।
खास तौर पर युवा मोर्चा की कमान गुजरात के डॉ. हेमांग जोशी को देना भाजपा की युवा राजनीति पर जोर का संकेत माना जा सकता है।
राजस्थान में वसुंधरा से लेकर पूनिया तक
राजस्थान से भी भाजपा ने कई प्रमुख चेहरों को राष्ट्रीय संगठन में जगह दी है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनी हैं। वहीं सतीश पूनिया को राष्ट्रीय महासचिव और राजेश मंगल को राष्ट्रीय संयुक्त कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
किसान मोर्चा के अध्यक्ष बंसीलाल गुर्जर भी राजस्थान की राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े हैं, जिससे राजस्थान का संगठनात्मक महत्व और बढ़ जाता है।
उत्तराखंड को संगठन और मीडिया दोनों में जगह
उत्तराखंड से तीरथ सिंह रावत राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। वहीं अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक, महेंद्र पांडे को राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री और आलोक भट्ट को सोशल मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी मिली है।
इस प्रकार छोटे पहाड़ी राज्य उत्तराखंड को भी भाजपा की केंद्रीय टीम में कई अहम जिम्मेदारियां मिली हैं।
दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर पर भाजपा की खास नजर
नई टीम में दक्षिण भारत को भी स्पष्ट प्रतिनिधित्व दिया गया है। केरल से के. सुरेंद्रन और अनिल एंटनी, तमिलनाडु से डॉ. एम. वेंकटेशन, कर्नाटक से प्रो. एम. नागराज और आंध्र प्रदेश से डी. पुरंदेश्वरी तथा विष्णु वर्धन रेड्डी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं।
पूर्वोत्तर के लिए डॉ. संबित पात्रा को नॉर्थ ईस्ट संयोजक और राजीव बब्बर को सह-संयोजक बनाया गया है। नागालैंड की फांगनोन कोन्याक राष्ट्रीय सचिव बनी हैं, जबकि असम से मृगांका देव बर्मन को भी राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिली है।
यह नियुक्तियां बताती हैं कि भाजपा पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में अपने संगठनात्मक विस्तार को लगातार प्राथमिकता दे रही है।
मोर्चों में सामाजिक समीकरण का संदेश
नितिन नबीन की नई टीम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक सात प्रमुख मोर्चों के अध्यक्षों की नियुक्ति है। युवा मोर्चे की जिम्मेदारी डॉ. हेमांग जोशी, महिला मोर्चे की रूप कुमारी चौधरी, ओबीसी मोर्चे की अमरपाल मौर्य, किसान मोर्चे की बंसीलाल गुर्जर, एससी मोर्चे की शिवेश कुमार राम, एसटी मोर्चे की डॉ. मन्नालाल रावत और अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी कुंवर बासित अली को दी गई है।
इन नियुक्तियों में भाजपा ने समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने का स्पष्ट संकेत दिया है।
संगठन की कमान अनुभवी हाथों में
नई टीम में बदलाव के बावजूद संगठन की मूल संरचना में निरंतरता दिखाई देती है। बीएल संतोष राष्ट्रीय महासचिव संगठन के पद पर बने हुए हैं। शिवप्रकाश और सौदान सिंह को राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव संगठन की जिम्मेदारी दी गई है।
राष्ट्रीय महासचिवों में विनोद तावड़े, सुनील बंसल, बिप्लब कुमार देब, स्मृति ईरानी, सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया जैसे प्रमुख नाम शामिल किए गए हैं।
वहीं पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और राजेश मंगल को राष्ट्रीय संयुक्त कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
नई टीम में 2029 की राजनीतिक तैयारी की झलक?
भाजपा की इस नई राष्ट्रीय टीम को केवल संगठनात्मक नियुक्तियों के तौर पर देखना शायद पर्याप्त नहीं होगा। जिस तरह अलग-अलग राज्यों, जातीय समूहों, सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दिया गया है, उससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी आने वाले वर्षों के लिए अपना संगठनात्मक आधार और व्यापक करना चाहती है।
युवा मोर्चे में नए चेहरे, महिला मोर्चे में महिला नेतृत्व, ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक मोर्चों में अलग-अलग सामाजिक प्रतिनिधित्व तथा दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों पर विशेष ध्यान इन सभी को एक साथ देखें तो नितिन नबीन की नई टीम एक व्यापक राजनीतिक रणनीति का संकेत देती दिखाई देती है।
सबसे बड़ा संदेश 'संगठन ही शक्ति'
नितिन नबीन की नई टीम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भाजपा चुनावी राजनीति के साथ संगठन को भी लगातार मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। अनुभवी नेताओं को बरकरार रखते हुए नए चेहरों को जिम्मेदारी देना, राज्यों के बीच संतुलन बनाना और विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देना इसी रणनीति का हिस्सा दिखाई देता है।
नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की मजबूत मौजूदगी, दिल्ली का केंद्रीय प्रभाव, राजस्थान और गुजरात का प्रतिनिधित्व, दक्षिण भारत की बढ़ती हिस्सेदारी तथा पूर्वोत्तर पर विशेष ध्यान भाजपा के संगठनात्मक नक्शे की तस्वीर साफ कर देता है।
अब इन नियुक्तियों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि नितिन नबीन की यह नई टीम भाजपा के संगठन को जमीन पर कितनी ताकत देती है और आने वाले चुनावों में इसका राजनीतिक असर कितना दिखाई देता है।
कुल मिलाकर भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम ने एक बात साफ कर दी है कि चेहरे बदले हैं, जिम्मेदारियां बदली हैं, लेकिन लक्ष्य एक ही है कि संगठन को और ज्यादा मजबूत करना और देश के हर हिस्से तक भाजपा की राजनीतिक पहुंच को विस्तार देना।
Tags :
समाचार समीक्षा

एक टिप्पणी भेजें