शिवपुरी में स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रॉमा-कार्डिएक ट्रेनिंग, BIMR विशेषज्ञों ने सिखाए जीवन रक्षक गुर
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BIMR हॉस्पिटल्स ग्वालियर के सुपर स्पेशलिस्ट्स ने सिखाए आपातकालीन चिकित्सा के आधुनिक तरीके और जीवन रक्षक तकनीकें
शिवपुरी। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय, शिवपुरी में आयोजित हुई, जिसमें जिलेभर के चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ ने सहभागिता की।
कार्यशाला का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषिश्वर की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन में किया गया। प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रॉमा, कार्डिएक इमरजेंसी, स्ट्रोक और अन्य गंभीर चिकित्सा परिस्थितियों में शुरुआती उपचार एवं त्वरित प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक चिकित्सा प्रबंधन के तरीके
ग्वालियर के BIMR हॉस्पिटल्स के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य कर्मियों को आपातकालीन परिस्थितियों में मरीज की स्थिति को तत्काल संभालने और जीवन रक्षक उपचार उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण तरीकों से अवगत कराया।
डॉ. अंकुर अग्रवाल (MBBS, MD, दम - कार्डियोलॉजी) ने हार्ट अटैक, कार्डिएक अरेस्ट और गंभीर हृदय रोगों के मामलों में त्वरित चिकित्सा प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने CPR की तकनीक, मरीज को शुरुआती स्तर पर स्थिर करने तथा ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान किए जाने वाले महत्वपूर्ण उपायों की जानकारी दी।
वहीं डॉ. ईशान मिश्रा (MD, दम - न्यूरोलॉजी/न्यूरो) ने गंभीर हेड इंजरी, सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े ट्रॉमा, स्ट्रोक (लकवा) और अन्य न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी के मामलों में प्राथमिक उपचार एवं त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया समझाई। प्रशिक्षण में गंभीर मरीजों की पहचान, तत्काल आवश्यक कदम और समय पर रेफरल के महत्व पर भी जोर दिया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को मिलेगा तत्काल जीवन रक्षक उपचार
कार्यशाला को संबोधित करते हुए CMHO डॉ. संजय ऋषिश्वर ने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की आपातकालीन चिकित्सा दक्षता बढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण है। दुर्घटना, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर परिस्थितियों में रेफरल से पहले मरीज को समय पर आवश्यक जीवन रक्षक उपचार मिलना उसकी जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही, गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाए जाने के दौरान बेहतर प्रारंभिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
कार्यशाला के माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने और टीम के रूप में प्रभावी ढंग से कार्य करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिला। इससे जिले की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करने तथा गंभीर मरीजों के बेहतर उपचार में मदद मिलने की उम्मीद है।
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