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भाजपा का यूपीअष्टक और हरीश की महत्ता - आचार्य संजय तिवारी

 



भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में यूपी अष्टक निर्मित हुआ है। इस अष्टक में हरीश द्विवेदी अब तक सबसे बड़े चेहरे के रूप में स्थापित दिख रहे हैं। यह महत्ता स्वयं में अनगिनत संदेश प्रसारित कर रही है। यह लिखने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि भाजपा संगठन में हरीश द्विवेदी का कद आज एक सामान्य सांसद से बहुत बड़ा है । वे संगठन के व्यक्ति हैं, और भाजपा अंततः संगठन की ही पार्टी है।


ऐसे में यह विचार जरूरी हो जाता है कि हरीश क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं। उनके पास अभी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी - बिहार , कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण बड़े राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर युवा मोर्चा का प्रभार भी है। हरीश द्विवेदी को बिहार का प्रभारी बनाया गया है, साथ में कर्नाटक का भी प्रभारी। विनोद तावड़े की जगह उन्हें लाया गया है। इसके ठीक 37 दिन पहले अगस्त 2026 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया था, और उसके बाद 7 मोर्चों में सबसे महत्वपूर्ण युवा मोर्चा का प्रभारी। यह ध्यान देने वाली बात है कि भाजपा में राष्ट्रीय महामंत्री 10-11 ही होते हैं, जो सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम होते हैं। यह पद सांसद से बड़ा माना जाता है।


भाजपा संगठन ने उत्तर प्रदेश में एक अष्टक का निर्माण किया है। यूपी के आठ नेताओं को प्रभारी/सह प्रभारी का जिम्मा दिया गया है। पार्टी ने यूपी के आठ नेताओं को राज्यों में प्रभारी/सह प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है। हरीश द्विवेदी अब बिहार एवं कर्नाटक के प्रभारी होंगे। स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ एवं हरियाणा का प्रभार मिला है।श्रीकांत शर्मा को हिमाचल प्रदेश का प्रभारी एवं दर्शना सिंह को सह प्रभारी बनाया गया है। संगीता यादव बिहार की सह प्रभारी होंगी। डॉ. भोला सिंह अब हरियाणा के सह प्रभारी होंगे। रेखा वर्मा अब मध्य प्रदेश के साथ ही तेलंगाना की सह प्रभारी होंगी। वहीं डॉ. स्वदेश सिंह को उड़ीसा का सह प्रभारी सौंपा गया है।


अब फिर आते हैं हरीश द्विवेदी पर जो छात्र राजनीति से निकल कर अब कैडर के बहुत बड़े नेता के रूप में उभरे हैं। हरीश बस्ती के रहने वाले हैं। 2004 से सक्रिय भाजपा में, छात्र राजनीति से आए हैं। 2012 में बस्ती सदर से विधानसभा हारे, पर संगठन ने साथ नहीं छोड़ा। 2014 में बस्ती से पहली बार सांसद बने, 2019 में दोबारा जीते। 2024 में हार गए, लेकिन पार्टी  में उनका ग्राफ बढ़ता ही गया। भाजपा में चुनाव हारना अंत नहीं है, संगठन में पकड़ ही असली पूंजी है।

हरीश द्विवेदी ने पार्टी में ट्रबल शूटर की छवि बनाई है और असम में सफलता उनके लिए बहुत मायने रखती है। इससे पहले वे असम के प्रभारी थे। उनके प्रभारी रहते हुए 2026 में असम में हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार फिर बनी। इस सफलता को देखते हुए ही उन्हें राजस्थान निकाय चुनाव की जिम्मेदारी दी गई और फिर बिहार जैसे सबसे कठिन राज्य की। केंद्रीय नेतृत्व मानता है कि वे बूथ स्तर के कार्यकर्ता को नाम से जानते हैं और सामाजिक समीकरण साध लेते हैं।

अब इतने के बाद यह भी कहना उचित होगा कि कलराज मिश्र और शिवप्रताप शुक्ल के बाद हरीश द्विवेदी इस समय यूपी का सबसे बड़ा ब्राह्मण और युवा चेहरा हैं। भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में यूपी से 8 लोगों को जगह मिली है, जिसमें 2 महामंत्री - स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी हैं। हरीश पूर्वांचल के बड़े ब्राह्मण चेहरे माने जा रहे थे लेकिन उनका फलक अब काफी बड़ा हो चुका है। अभी वह एक प्रकार से युवा भी हैं। पार्टी को 2027 यूपी विधानसभा के लिए युवा ब्राह्मण चेहरे की जरूरत है, और वे दोनों भूमिका में फिट बैठते हैं।


भाजपा के आंतरिक सूत्रों के अनुसार, हरीश जी चुनावी प्रबंधन, बूथ सशक्तिकरण और अनुशासन के मामले में अमित शाह और अब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के सबसे भरोसेमंद लोगों में हैं। इसीलिए उन्हें लगातार प्रमोशन मिल रहा है - राष्ट्रीय सचिव से राष्ट्रीय महामंत्री, फिर भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रभारी, फिर दो बड़े राज्यों का प्रभारी।


पार्टी का संदेश स्पष्ट है। हरीश द्विवेदी नितिन नवीन की अगुवाई वाली नई भाजपा में राष्ट्रीय फ़लक पर सबसे बड़ा युवा ब्राह्मण चेहरा हैं।

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