वन्दे मातरम् : राष्ट्रभाव, राष्ट्रीय सम्मान और 2026 का नया कानूनी संरक्षण - कैलाश चन्द्र
“वन्दे मातरम्” का अल्प विरोध भी दिमागी नक्सलवाद और अलगाववादी मानसिकता का प्रतीक है—यह कहना तभी सार्थक होगा …
“वन्दे मातरम्” का अल्प विरोध भी दिमागी नक्सलवाद और अलगाववादी मानसिकता का प्रतीक है—यह कहना तभी सार्थक होगा …
कांग्रेस की वर्किंग कमेटी कुछ नया नहीं कर रही। जन्म से अब तक कांग्रेस तुष्टिकरण करती रही है। भारत और भारतीय…
एक बंगाली कहावत है - “मायेर स्तबेर अर्धेक ग्रहण, अर्धेक बर्जन, ए कैमन सन्तानेर भक्ति?” मातृभूमि के स्तुति ग…
हाथों में हथकड़ी नहीं है, सामने पुलिस नहीं है, सिर्फ एक स्क्रीन है, फिर भी इंसान अपना सब कुछ गंवा बैठता है।…
सुबह जल्दी-जल्दी कार्यालय जाने के लिए निकलते समय हम घड़ी पर एक नजर डालते हैं, समय पर पहुंचने की चिंता में। …
वर्तमान समय में फिल्म, राजनीति और व्यापार-उद्योग के क्षेत्र में सोशल मीडिया का प्रभाव बहुत बढ़ गया है और इस…
“द सोशल कांट्रैक्ट्स” (Du contrat social) जीन सेक्स रूसो की वर्ष 1762 में प्रकाशित एक प्रसिद्ध पुस्तक है। इ…
देश के प्रधानमत्री ने देश की अंदरूनी शान्ति के लिए या आगे किसी बड़े लक्ष्य को साधने के लिए ऐसी फॉरेन फंडेड,…
आज का बाजार आकर्षक ऑफर्स और छूट योजनाओं से भरा हुआ है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों में ग्राहकों को लुभा…
भारत में लोकतंत्र की जड़ें केवल संसद, विधानसभा और बड़े राजनीतिक मंचों में नहीं, बल्कि गांवों, कस्बों और नगर…
संयुक्त राष्ट्र द्वारा हाल ही में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। इस रिपोर्ट ने भारत के विकास, वर्चुअल रियलिट…
ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया तथा डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस जैसी एजेंसियां ऑनलाइन गेमिंग पर निग…
भील और भारिया की दो कहावतें हैं - भील कहते हैं, "होने नी रेत, ने खोने नो डर” और भारिया कहते हैं "…