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दिवाकर की दुनाली से

दिवाकर की दुनाली से

पत्रकारिता का सच: लिखने वाले, दिखने वाले और बिकने वाले

पत्रकारिता कभी सवाल पूछने की हिम्मत का नाम थी। स्याही की गंध में सच की आग जलती थी। कलम डरती नहीं थी, झुकती …

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शिवपुरी में दोहरा कानून: नशे की दुकानें सुरक्षित, शिवालय पर सख्ती

शिवपुरी आज दो अलग-अलग घटनाओं के जरिए एक ही सवाल पूछ रही है कि कानून आखिर किसके लिए है और किसके खिलाफ। मेडिक…

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रेट कार्ड पत्रकारिता: किसानों की पीड़ा पर सौदेबाज़ी का खुलासा

पत्रकारिता को कभी समाज की आँख, कान और आवाज़ कहा जाता था। आज वही पत्रकारिता कई जगहों पर रेट कार्ड में तब्दील…

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शिवपुरी मेडिकल कॉलेज: इलाज नहीं, विवादों की फैक्ट्री

शिवपुरी को जब मेडिकल कॉलेज मिला था, तब इसे स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया गया था। उम्मी…

दिवाकर की दुनाली से

शिवपुरी: चार दिशाएँ, चार पहचानें… फिर भी शिवपुरी किसका?

दिवाकर की दुनाली से ✍️ नक्शे पर शिवपुरी पूरी स्पष्टता से दर्ज है। यह कोई सीमांत कस्बा नहीं, बल्कि मध्यप्रदे…

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करैरा: अपराध, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक चुप्पी का खतरनाक केंद्र

करैरा विधानसभा, शिवपुरी जिले की पाँच विधानसभाओं में से एक, आज जिस पहचान की ओर बढ़ रही है, वह न केवल चिंताजन…

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RSS पर नजर, जमात पर खामोशी—आखिर क्यों? – दिवाकर शर्मा

भोपाल में हाल ही में समाप्त हुआ तब्लीगी जमात का विशाल इज्तिमा केवल धार्मिक आयोजन भर नहीं था यह अनेक गंभीर प…

दिवाकर की दुनाली से

क्या मध्य प्रदेश के नगर निकाय अब भ्रष्टाचार के अड्डे बन चुके हैं?

मध्य प्रदेश के नगर निकायों में भ्रष्टाचार अब किसी एक विभाग, किसी एक व्यक्ति या किसी एक शहर की समस्या नहीं र…

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स्वघोषित कलमवीरों का लिफाफा महोत्सव – दिवाकर शर्मा

दिवाली का मौसम है, दीये जल रहे हैं, मिठाइयाँ बाँटी जा रही हैं, और नेताओं के चेहरे पर मुस्कानें हैं। लेकिन इ…

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शिवपुरी की पत्रकारिता के नाम एक सबक – दिवाकर शर्मा

मध्यप्रदेश के दो पत्रकारों आनंद पांडे और हरीश दिवेकर की राजस्थान पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी ने पत्रकारिता…

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ग्वालियर विवाद: जब शब्द बने हथियार और विवेक बना सवाल

जब समाज का आईना धुँधला कर दिया जाए तो सच्चाई को साफ़ बोलना अपराध नहीं—कर्तव्य बन जाता हैं। ग्वालियर की धरती…

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मप्र कफ सिरप कांड: जनऔषधि केंद्र और मेडिकल माफिया पर सवाल – दिवाकर शर्मा

मध्यप्रदेश से उठी खबर हर संवेदनशील मन को झकझोर रही है—कफ सिरप से मासूम बच्चों की मौत! यह कैसी त्रासदी है कि…

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क्या संघ का प्रणाम सचमुच अल्बानियाई राजा की नकल है? – दिवाकर शर्मा

संघ विरोधियों की एक बीमारी है—हर भारतीय चीज़ में विदेशी छाया ढूँढ़ लेना। उन्हें भगवा दिखे तो उसमें फासीवाद …

ज़्यादा पोस्ट लोड हो रहा है… That's All